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संवेदनशीलता,मानवीयता,करुणा,सकारात्मकता के साथ समाज से हिंसा विलोपित हो और हम सभ्य समाज का हिस्सा बने हमें अपने नैतिक कर्तव्यों और अधिकारो का बोध हो ऐसे ही विविध पहलुओं को लेकर एकेएस विश्वविद्यालय, सतना के एमएसडब्ल्यू विभाग की विभागाध्यक्ष मंजू चैटर्जी के मार्गदर्शन में डिपार्टमेंट आॅफ एमएसडब्ल्यू के तीन विद्यार्थियों सुधीर पाठक, इंदिरा सोनी और मेनका सोनी ने 23, 24 और 25 नवंबर को राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट समा संस्था दिल्ली द्वारा भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। कार्यशाला में जेन्डर आधारित हिंसा के स्वरुप पर विस्तारित विमर्श हुआ। समाज में पुरुष और महिलाओं के साथ ज्यादातर हिंसा हुई इस पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए रीना जी, एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। कोराना के समय में हिंसा में बढोत्तरी हुई, परिवारों में क्या सकारात्मक और नकारात्मक तत्व जुडे इसके क्या कारण रहे पर भी चर्चा के साथ निवारण पर भी बहस की गई। हिंसा लगातार यानी कोविड-19 के पहले से हो रही है या इसके स्वरुप में परिवर्तन हुआ पर भी विमर्श हुआ। कार्यशाला में पुलिस प्रशासन की संजीदगी ओर लापरवाही के परिणामों पर सारगर्भित बात की गई। मीडिया के बढते दखल के बीच क्या परिवर्तन दृष्टिगोचर हो रहे हैं और समाज के क्या दायित्व है और समाज क्यों बदल रहा है इस पर भी गहन चर्चा हुई। पाॅस्को एक्ट-2012, महिला हिंसा एवं घरेलू हिंसा संरक्षण अधिनियम,2005, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013,मानव अधिकार आयोग के दिशा निर्देश,महिला आयोग के दिशा निर्देश पर चर्चा के साथ कानूनों के प्रावधानों को भी जाना। यह कार्यशाला विद्यार्थियों के कॅरियर के लिहाज से काफी अहम रही जिसमें प्रतिभा सिंह ट्रेनर ने कई तथ्यों के साथ जानकारी साझा की। जो दिखता है उससे इतर क्या सही है पर पुलिस प्रशासन, मीडिया और समाज की भूमिका रेखंकित करते हुए परिचर्चा में मंजू चैटर्जी की कविता जिंदगी की सीलन में दीमक बनों और रातों-रात बंद इन दीवारों की खिडकियों, रोशनदान और दरवाजों को चाल दो ....को काफी सराहा गया।

 

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एकेएस वि.वि. सतना ने आस्ट्रेलियन पेटेंट एक्ट 1990 द्वारा 8 वर्षो के लिए सिस्टम स्मार्ट इटीग्रेटेड ट्रैफिक कंन्ट्रोल की प्रणाली डेव्हलप करने पर पेटेंट हासिल किया है। इस प्रणाली के तहत भीड भरे शहर में यातायात का प्रबंधन अब बडी चुनौती साबित हो रहा है। वर्तमान में हर रुट पर पथ और दिशा के हिसाब से ट्रैफिक लाइट का संचालन समय निश्चित है पर कई बार इसमें विसंगति नजर आती है और वाहन न होने पर भी वाहनों को रुकना पडता है। यातायात प्रबंधन को प्रभावी ढंग से सुधारने के लिए एकेएस वि.वि. के मैकेनिकल इंजी.विभाग सतना के विभागाध्यक्ष डाॅ.पंकज श्रीवास्तव ने टीम के साथ आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस पर आधारित एक प्रणाली का प्रस्ताव पेश किया जिसे 8 वर्षो का पेटेंट हासिल होना एक बडी उपलब्धि और गौरव का विषय है। इसकी कार्यप्रणाली की बात करें तो आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस वाहनों की संख्या और लगी कतारों की लंबाई के आधार पर ट्रैफिक लाइट को संचालित करेगा। इस उपकरण में कैमरा, क्यू डिटेक्शन यूनिट, संचार नेटवर्क, कंट्रोल यूनिट, डेटाबेस यूनिट,आदि के समग्र समन्वयन के अनुसार सिस्टम केन्द्रीय यातायात नियंत्रण प्रणाली से युक्त होगा। सिस्टम स्वचलित रुप से मशीन लर्निग एल्गोरिथम का उपयोग करके ट्रैफिक लाइट को प्राथमिकता देगा इस बेहतर सामंजस्य की बदौलत बेहतर यातायात प्रबंधन में मदद मिलेगी। वि.वि. की इस उपलब्धि पर वि.वि. के कुलाधिपति माननीय बी.पी.सोनी जी,वि.वि. के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी,प्रतिकुलपति डाॅ.हर्षवर्धन,प्रो.आर.एस.त्रिपाठी,इंजी.डीन प्रो. जी.के.प्रधान ने समस्त मैकेनिकल विभाग को और बैहतर कार्य करने की शुभकामनाऐं दीं है।

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एकेएस विश्वविद्यालय सतना के प्रासार में विश्वविद्यालय के कैडेटों द्वारा राष्ट्रीय कैडेट कोर की 71 वीं वर्षगांठ मनाई गई इस मौके पर संबोधित करते हुए बताया गया कि इसमें नौसेना,सेना और एअर विंग शामिल हैं जो देश के युवाओं को अनुशासित और देशभक्त नागरिकों के रुप में सॅवारने में लगे हुए हैं। कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डाॅ. हर्षवर्धन ने कहा कि एनसीसी एक वालियंटियरी आर्गेनाइजेशन है।स्कूल काॅलेज में पढ़ने वाले युवा अपनी इच्छा से इसे ज्वाइन कर सकते हैं। एनसीसी कैडेट को देश की सेनाओं की यूथ विंग कहा जाता है। इंजीनियरिंग एडमिनिस्ट्रेटर इंजी. आर.के. श्रीवास्तव ने उद्बोधन में पाकिस्तान के साथ हुए युद्व का जिक्र किया 1965 और 1971 में जंग हुई तो एनसीसी कैडेट्स को आर्डिनेंस फैक्ट्रियों में भेजा गया ताकि वे मोर्चे पर तैयान सैनिकों को हथियार और गोला बारूद भेजने में मदद कर सकें।इसके साथ ही दुश्मन के पैराट्रोपर्स को पकड़ने के लिये इन्हें पेट्रोलिंग पार्टीज के तौर पर भी प्रयोग किया गया। खास बात यह रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी एनसीसी कैडैट रह चुके हैं। प्रो.जी.सी. मिश्रा ने अपनी राय दी कि एनसीसी ज्वाइन करने के लिये आपका भारतीय नागरिक होना पहली और अनिवार्य शर्त है। इसी के साथ छात्रों को मानसिक तथा शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है। टीपीओ एम.के. पाण्डेय ने एनसीसी को स्कूल के समय में छात्रों को सेना में जाने के लिये प्रोत्साहित करने वाला संगठन निरुपित किया। इसके अगले क्रम में मैनेजमेंट विभागाध्यक्ष डाॅ. कौशिक मुखर्जी ने बतौर सेना में रहते अपने अनुभवों से रुबरु कराया कि एनसीसी लड़के और लड़कियों दोनों ही के लिये है। लड़कियों के लिये जूनियर विंग और सीनियर विंग और लड़कों के लिये जूनियर डिवीजन, सीनियर डिवीजन है। लेफ्टिनेंट प्राची सिंह ने डयूटी, एकता और अनुशासन के नियम बताए साथ ही जानकारी दी कि एनसीसी में सर्टिफिकेशन ए सर्टिफिकेट जूनियर के उन कैडेट्स को मिलता है जो दो साल की ट्रेनिंग को पूरा कर लेते हैं, बी सर्टिफिकेट सीनियर छात्रों को दो साल की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मिलता है जबकि एनसीसी सी सर्टिफिकेट उन छात्रों को मिलता है जो तीन साल की ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं। मिर्जा समीउल्ला बेग ने मंच से कहा कि एनसीसी ज्वाइन करने के लिये न्यूनतम आयु 12 साल और अधिकतम आयु 26 साल है। प्रो. राजीव बैरागी ने स्थापना बिंदु के लिए कहा कि एनसीसी की शुरुआत 15 जुलाई 1948 को नेशनल कैडेट कोर एक्ट के तहत हुई थी, एनसीसी पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में सेकेण्ड लाइन आॅफ डिफेंस के तौर पर था। कार्यक्रम के अंत में बताया गया कि एनसीसी डे सेलिब्रेशन से राष्ट्रीय गरिमा का आभास होता है,देश में कोविड-19 के खिलाफ जारी वैक्सिनेशन अभियान में वैक्सीन सेंटर पर आर्मी यूनिफार्म में जो युवा नजर आते हैं वह एनसीसी का ही हिस्सा हैं। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये और एनसीसी डे सेलिब्रेशन का औचित्य भी समझाया गया।

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एकेएस विश्वविद्यालय,सतना में प्रतिवर्ष छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क carrier counselling आयोजित की जाती है इसी कडी में एकेएसयू वि.वि. की educational visit पर कन्या धवारी और gov. school रामपुर बाघेलान, गवर्नमेंट हायरसेकेन्डरी स्कूल,कोठी,गवर्नमेंट गल्र्स हा.सेकेन्डरी उॅचेहरा के छात्र-छात्राऐं शामिल हुए विद्यार्थी अपने प्राध्यापकों के साथ computer field गणित की विविधता और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी लेने आए। विश्वविद्यालय में आयोजित कॅरियर काउंसिलिंग एण्ड कम्प्यूटर में एज्यूकेशनल विकल्पों पर एकेएस वि.वि. Department of computer के Faculty ने प्रकाश डाला जिसमें हरिमोहन मिश्रा सर ने लिब्रे office और फैकल्टी सीमा पटेल ने computer security और हैकिंग पर Lecture दिया और प्रैक्टिकल भी परफार्म करवाए। कार्यक्रम में वि.वि. के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी, ने जीवन के अहम पहलुओं और विद्यार्थी जीवन पर चर्चा करते हुए बताया कि समस्याओं का समाधान कैसे करें उन्होेने आगे बढने का मूल मंत्र प्रदान करतेे हुए कहा कि जो पाना है वह पाने के लिए पहले हर बैरियर को दूर करना होगा। विभागाध्यक्ष डाॅ.अखिलेश ए.वाऊ ने कक्षा नौ और दस के अध्ययनरत विद्यार्थियों को Department of computer में संचालित डिप्लोमा, सीएसई, बी.टेक.सीएसई, बीसीए आनर्स, बीएससी, आईटी, आनर्स, बी.टेक.कम्प्यूटर, बीएससी,सीएस, डीसीए, एमएससी, पीजीडीसीए, एमएससी इन cyber security and digital फोरेन्सिक, Diploma in cyber security and digital forensic courses के बारे में विस्तार से बताते हुए समझाया कि एकेएस वि.वि. का computer science विभाग आईआईटी मुम्बई का रिमोट सेंन्टर भी है और कई छात्र बडी कंपनियों में कार्यरत हैं। एकेएस वि.वि. में विधिवत लैब्स और कक्षाऐं हैं। कार्यक्रम के दौरान उॅचेहरा स्कूल से प्राध्यापक राहुल ताम्रकार, नविका जैसवाल, कोठी स्कूल से आदित्य मिश्रा, अनुभव त्रिपाठी, धवारी स्कूल से अनिरुद्व गौतम, आदित्य द्विवेदी, अनिता गौतम, और कल्पना गर्ग और वि.वि. सेे इंजीनियरिंग डीन डाॅ.जी.के.प्रधान, मार्केटिंग हेड अविनाश मिश्रा,आईटी हेड सोनू कुमार सोनी, एडमिनिस्ट्रेटर ब्ृजेन्द्र कुमार सोनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में एकेएस वि.वि. के प्राध्यापकों ने विजिटिंग विद्यार्थियों के सवालों के तर्कसम्मत उत्तर भी प्रदान किए।

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एकेएस वि.वि. सतना की जैवप्रौद्योगिकी विभाग में एमएससी, Biotechnology की 2018 बैच की होनहार छात्रा गायत्री सोंधया ने अपनी मेहनत और अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोंण को समझते हुए निर्थ में बतौर Project Research Associate चयन में सफलता हासिल की है। गायत्री का चयन बतौर Project Research एसोसिएट बहुआयामी कार्य के लिए किया गया है गायत्री (निर्थ) राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान परिषद, जबलपुर में कार्य अवसर प्राप्त करेगी। उनके Project का विषय मध्य भारत से ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी रोगाणुओं के विभिन्न उपभेदों का आणविक लक्षणीकरण,जीनोम अनुक्रमण और तुलनात्मक विश्लेषण जैसे विषय पर इन्हें शोध करने के लिए साक्षात्कार आधार पर चयन किया गया है। उल्लेखनीय है कि गायत्री को तीन लाख पचास हजार पर एनम के Salary Packageपर नियुक्ति मिली है। उनके चयन पर Biotechnology विभाग के डीन डाॅ.जी.पी.रिछारिया, विभागाध्यक्ष डाॅ.कमलेश चैरे के साथ समस्त फैकल्टी मेंम्बर्स ने उज्जवल भविष्य की शुभकामनाऐं दीं हैं और चयन पर हर्ष व्यक्त किया हैं।

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एकेएस वि.वि. सतना के मैकेनिकल संकाय के बी.टेक.सातवें और Diploma थर्ड के विद्यार्थियों ने जल विद्युत केन्द्र देवलौद,बाणसागर की एकदिवसीय Visit की। वि.वि. के विद्यार्थियों ने तीन वाय बीस एमडब्ल्यू Plant Capacity की Visit के दौरान टरबाइन की कार्यविधि के बारे में विस्तार से प्रैक्टिकल जानकारी प्राप्त की बाॅध से टरबाइन तक पानी आने की प्रक्रिया और टरबाइन में जो मैकेनिकल एनर्जी प्राप्त होती है वह विद्युत उर्जा में जनरेटर के माध्यम से परिवर्तित होती है मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय में मशीनरी के विषय में विद्यार्थी जल विद्युत संयंत्र का अध्ययन करते हैं इसी के साथ छात्रों ने स्पिलवे, गेट, Elementary Profile of up and Down Area,फ्रांसिस टर्बाइन के साथ समस्त जानकारियाॅ हासिल की। मैकेनिकल संकाय के विद्यार्थियों को उनके फैकल्टी आलोक रंजन तिवारी और रामनारायण शुक्ला में मार्गदर्शित किया और उन्हें बाणसागर बाॅध के बनने से लेकर इसके भौगोलिक क्षेत्र और समूचे परिदृष्य,उपादेयता और कार्यविधि को लेकर जानकारी दी। विद्यार्थियों ने इसे बेहद जानकारी वाली Visit बताया और कहा कि हम भी ऐसे बडे कार्यों में भविष्य में शामिल होंगें। वि.वि. प्रबंधन ने Visit पर हर्ष व्यक्त करते हुए छात्रों को ऐसे मौकों पर विषय विशेषज्ञों से अधिकतम प्रैक्टिकल नाॅलेज प्राप्त करने की सलाह दी है जो सवालों से अधिक जानकारी और अपनी उत्सुकता से संबंधित जवाब प्राप्त कर सकते है।

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एकेएस वि.वि. सतना के B.Tech Electrical Engineering  विभाग के फस्र्ट सेमेस्टर के छात्र Training के लिए जब 132 केवी Substation गए तो उनके मन में उठ रहे सवालों को भाॅपकर उन्हे यह बताया गया कि विद्युत उत्पादन संचारण और वितरण प्रणालियों में प्रयुक्त एक सहायक केन्द्र होता है जहाॅ वोल्टता को Transformer की सहायता से अधिक से कम या ज्यादा से कम किया जा सकता है। विद्युत उत्पादन केन्द्र से लेकर विद्युत उपभोक्ता तक कई केन्द्र लगाने और सामंजस्य की जरुरत पडती है। छात्रों ने 132 केवी Substation की Visit के दौरान जब पूफछा कि सभी यंत्र कार्य कैसे करते हैं तो उन्हें इस्तेमाल हो रहे पावर ट्रान्सफार्मर, Auto Transformer, उच्च Voltage circuit Breaker, Grounding, अरेस्टर, धारा ट्रान्सफार्मर, voltage transformer, संयुक्त उपाय, बसवार, संधारित्र, द्वितियक, सुरक्षात्मक रिले, निगरानी उपकरण, स्क्रीनिंग उपकरण, दूर नियंत्रक प्रणाली, उर्जा मापन, सहायक शक्ति, दूरसंचार उपकरण, State Recorder जैसे उपकरणों की विस्तृत जानकारी कार्या और कैसे होता है का पे्रक्टिकल ज्ञान डीई,अभय सक्सेना के मार्गदर्शन में मिला। छात्रों को अवगत कराया गया कि वोल्टता को कई चरणों में बदलना एक संपूर्ण प्रक्रिया है। छात्रों ने बताया कि यहाॅ पर यह सिखाया गया कि Electronicमें एनर्जी का लाॅस नही होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि एकेएस वि.वि. के सभी संकायों में विद्यार्थियों को विविध इंडस्ट्रीज की कार्यशैली, सिस्टम तथा मशीनों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए ट्रेनिंग एवं विजिट आयोजित होती है और वहीं से विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र का बेहतर ज्ञानार्जन का अवसर भी मिलता है। विषय के बारे मे विस्तार से जानकारी के लिए वि.वि. के फैकल्टी इंजी.अजय सिंह, रवि नागवंशी, तथा के.के.तिवारी उपस्थित रहे। छात्रों की ट्रेनिंग पूर्ण करने के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग संकाय की विभागाध्यक्ष रमा शुक्ला और एडमिनिस्ट्रेटर इंजी.आर.के.श्रीवास्तव ने हर्ष व्यक्त करते हुए छात्रों को विषय विशेषज्ञों के मिले ज्ञान को संग्रहीत करने और उन्हें एप्लायबल बनानें का निर्देश दिया।

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एकेएस विश्वविद्यालय,सतना में प्रतिवर्ष छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क कॅरियर काउंसिलिंग आयोजित की जाती है इसी कडी में एकेएसयू वि.वि. की एज्यूकेशनल विजिट पर एमएलबी और व्यंकट एक के विद्यार्थी अपने प्राध्यापकों के साथ कम्प्यूटर फील्ड की विविधता और रोजगार की संभावनाओं के बारे में जानकारी लेने आए। विभागाध्यक्ष डाॅ.अखिलेश ए.वाऊ ने कक्षा नौ और दस के अध्ययनरत विद्यार्थियों को department of computer में संचालित डिप्लोमा, सीएसई, बी.टेक.सीएसई, बीसीए आनर्स, बीएससी, आईटी, आनर्स, बी.टेक.कम्प्यूटर, बीएससी,सीएस, डीसीए, एमएससी, पीजीडीसीए, एमएससी इन cyber security And Digital forensic course, Diploma in cyber security And Digital forensic course के बारे में विस्तार से बताते हुए समझाया कि एकेएस वि.वि. का कम्प्यूटर साइंस विभाग आईआईटी मुम्बई का Remote center भी है और कई छात्र बडी कंपनियों में कार्यरत हैं। एकेएस वि.वि. में विधिवत लैब्स और कक्षाऐं हैं। पूर्व में विश्वविद्यालय में आयोजित कॅरियर काउंसिलिंग एण्ड कम्प्यूटर में Educational विकल्पों पर एकेएस वि.वि. Department Of Computer forensic के Faculty ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वि.वि. के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी, प्रतिकुलपति डाॅ.हर्षवर्धन, विभागाध्यक्ष डाॅ.अखिलेश ए.वाऊ, व्यंकट एके के प्राध्यापक ब्रजनंदन तिवारी, अभिषेक पाण्डेय, एमएलबी से शिवबालक कुशवाहा, शमीदा बेगम,एकेएस की कम्प्यूटर फैकल्टी शिवानी पटनहा के साथ समस्त फैकल्टीज ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। Educationalकार्यक्रम में महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल और व्यंकट क्रमांक एक के नवमी और दसवीं के छात्र छात्राओं को जानकारी प्रदान की गई और उनके सवालों के तर्कसम्मत उत्तर भी प्रदान किए गए।

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एकेएस विश्वविद्यालय सतना के द्वारा स्पाॅसर्ड दो दिवसीय Solar Panel Installation एवं कार्यप्रणाली का विद्यार्थियों ने विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में अध्ययन किया। B.tech Electrical संकाय के विद्यार्थियों ने TATA Power के इंजीनियर मनीष तिवारी का विस्तृत जानकारी भरा व्याख्यान सुना उसके बाद लर्न व्हाइल यू डू की तर्ज पर Solar Panel में इस्तेमाल होने वाली हर बारीक जानकारी का नमूना भी देखा। 100 किलोवाट Solar Panel जिसमें आन ग्रिड सिस्टम भी लगा हुआ है इस विषय पर सम्पूर्ण कार्यपद्धति इंजी. मनीष ने विद्यार्थियों के साथ साझा की। सर्वप्रथम सोलर पैनल की वायरिंग कैसे की जाय, इन्वर्टर की कार्यपद्धति क्या होती है, कन्वर्टर किस तरह से मिली हुई सोलर एनर्जी को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करता है, अर्थिंग की क्या उपयोगिता है यह कितनी होनी चाहिए, एलीवेटर का कार्य क्या है पर सम्पूर्ण जानकारी Installation करके इंजी. मनीष ने विद्यार्थियों को दी। Faculty of Engineering And Technology के बी.टेक Electrical विभाग के फैकल्टीज आशुतोष दुबे, इंजी. दिवाकर दुबे, अच्युत पाण्डेय, रवि नागवंशी, इंजी. अजय सिंह, के.के. त्रिपाठी, के.के. तिवारी और मधु सोनी ने सोलर पैनल विद आन ग्रिड सिस्टम के अध्ययन अध्यापन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। एडमिनिस्ट्रेटर इंजी. आर.के. श्रीवास्तव ने उपस्थित विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अतिथि व्याख्यान के दौरान हमें विशेष जानकारियाँ प्राप्त होती हैं। विश्वविद्यालय में इस तरह के कार्यक्रम हर विभाग में प्रैक्टिकल के लिये हाथ से करवाये जाते हैं। कार्यक्रम की सम्पूर्ण रूपरेखा विभागाध्यक्ष इंजी. रमा शुक्ला ने तय की और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को 100 किलोवाट सोलर पैनल विद आन ग्रिड सिस्टम की सम्पूर्ण जानकारी के लिये मंच भी उपलब्ध कराया। विद्यार्थियों ने कहा कि सम्पूर्ण व्याख्यान और प्रैक्टिकल नाॅलेज कॅरियर निर्माण में अहम भूमिका अदा करेंगे।

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एकेएस वि.वि. सतना के "Department of cement Technology" में व्याख्यान का आयोजन किया गया । उल्लेखनीय है कि Popular Guest lecture Series के तहत र्वििभन्न संकायों में नियमित रुप से विषय की जरुरत के लिहाज से Guest lecture का आयोजन किया जाता है इसी कडी में Department of cement Technology में Roe Meal operation, उसके मैकेनिकल और Process Optimization पर सौराष्ट्रा cement limited के section Engineering इंजी.शनि रैकवार (राॅ मिल) ने क्रमबद्व और सुसंगत जानकारी स्टूडेन्टस के साथ शेयर करते हुए बताया कि करेक्ट फार्मुयुलेशन के तहत cement plant के लिए ग्रिडिंग दो प्रकार से की जाती है जिसमें ड्राय ग्रिडिंग और वेट ग्रिडिंग प्रमुख हैं इसके लिए मिल्स में बाल मिल्स, रोलर मिल्स और हैमर मिल्स समय के साथ अपडेट होकर नई जेनरेशन तक आ गई हैं। संपूर्ण प्रोसेस में oxide, Gray limestone, white Limestone ,क्ले, सैड, केओलिन, बाक्साइड के साथ फ्लाईऐश का इस्तेमाल होता है। राॅमिक्स को सीमेन्ट किल्न में डालकर प्रोसेस किया जाता है कैल्सियम सिलिकेट और फ्लैक्सेस की मात्रा तय होती है।संपूर्ण प्रक्रिया को उन्होने विस्तारपूर्वक समझाया। कार्यक्रम के दोरान Department of cement Technology के सभी वरिष्ठजनो के साथ Diploma और B tech Student शामिल हुए और विषय पर सुसंगत जानकारी प्राप्त की।

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